विद्युत चुम्बकीय प्रेरण एक भौतिक घटना है जिसमें किसी चालक के माध्यम से विद्युत धारा प्रवाहित होती है जब चालक के चारों ओर का चुंबकीय क्षेत्र समय के साथ बदलता रहता है। यह एक महत्वपूर्ण घटना है जो कई आधुनिक उपकरणों के संचालन के लिए आवश्यक है, जैसे कि जनरेटर, मोटर और ट्रांसफार्मर।
विद्युत चुम्बकीय प्रेरण का सिद्धांत सर माइकल फैराडे द्वारा 1831 में खोजा गया था। फैराडे ने पाया कि जब एक चुंबक को एक बंद चालक के पास ले जाया जाता है, तो चालक के माध्यम से एक विद्युत धारा प्रवाहित होती है। यह धारा तब तक प्रवाहित होती रहती है जब तक चुंबक चालक के पास होता है या जब तक चुंबकीय क्षेत्र बदलता रहता है।
विद्युत चुम्बकीय प्रेरण के दो प्रकार हैं:
- स्व-प्रेरण: यह तब होता है जब एक चालक के माध्यम से विद्युत धारा प्रवाहित होती है और इससे उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र उसी चालक के माध्यम से विद्युत धारा को प्रेरित करता है।
- आपसी प्रेरण: यह तब होता है जब दो चालकों के बीच चुंबकीय क्षेत्र बदलता रहता है और इससे एक चालक के माध्यम से विद्युत धारा दूसरे चालक को प्रेरित होती है।
विद्युत चुम्बकीय प्रेरण के कई व्यावहारिक अनुप्रयोग हैं। कुछ उदाहरणों में शामिल हैं:
- जनरेटर: जनरेटर विद्युत ऊर्जा उत्पन्न करते हैं। वे एक चुंबक को एक बंद चालक के पास ले जाकर या एक चालक को एक बदलते चुंबकीय क्षेत्र में घुमाकर ऐसा करते हैं।
- मोटर: मोटर विद्युत ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा में परिवर्तित करते हैं। वे एक चालक को एक चुंबकीय क्षेत्र में घुमाकर ऐसा करते हैं।
- ट्रांसफार्मर: ट्रांसफार्मर विद्युत शक्ति को एक वोल्टेज स्तर से दूसरे वोल्टेज स्तर में परिवर्तित करते हैं। वे दो चालकों के बीच आपसी प्रेरण का उपयोग करके ऐसा करते हैं।
विद्युत चुम्बकीय प्रेरण एक महत्वपूर्ण भौतिक घटना है जो हमारे जीवन के कई पहलुओं को प्रभावित करती है। यह आधुनिक दुनिया में विद्युत ऊर्जा के उत्पादन, उपयोग और वितरण के लिए आवश्यक है।


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